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11 / 13 · निवास

श्मशान में रहना (सोसानिकङ्ग)

मृत्यु और अनित्यता पर चिंतन के लिए दाह-स्थल के पास निवास करना।

लेखक
Dhutanga.org संपादकीय टीम
समीक्षा
धार्मिक-सैद्धांतिक समीक्षा लंबित
परंपरा
थेरवाद, तुलनात्मक टिप्पणियों सहित
प्रकाशित
अंतिम समीक्षा
पालि नाम
Sosānikaṅga
वर्ग
निवास

अर्थ

सुसान का अर्थ है “श्मशान” या “कब्रिस्तान”। साधक वहाँ रहता है जहाँ शव छोड़े या जलाए जाते थे, ताकि मरणस्सति (मृत्यु की सजगता) को सहारा मिले।

इसका पालन कैसे होता है

साधक स्थानीय लोगों और रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए श्मशान में या उसके पास रहता है, और उस वातावरण का उपयोग शरीर की अनित्यता पर चिंतन के लिए करता है।

कठोरता के स्तर

स्तरों में अंतर इस बात का है कि वह स्थान कितनी लगातार उपयोग में रहता है और साधक उसके दृश्यों और ध्वनियों के बीच कितना सीधे रहता है।

परंपरा में बताए गए लाभ

  • मृत्यु की सजगता
  • काम-वासना और घमंड में कमी
  • निर्भयता
  • जीवन की अमूल्यता की गहरी समझ

व्रत कब भंग होता है

जब साधक ऐसे स्थान पर चला जाता है जो श्मशान नहीं है, तब यह व्रत भंग हो जाता है।

आज का संदर्भ

विसुद्धिमग्ग इस साधना को भिक्षुणियों के लिए सुझाई गई साधनाओं में शामिल नहीं करता, और इसके लिए सशक्त मार्गदर्शन आवश्यक है। आज के भिक्षु कभी-कभी श्मशान में चिंतन करते हैं, पर बहुत कम वहाँ रहते हैं। यह समझने योग्य पारंपरिक साधना है, नकल करने योग्य नहीं।

सभी तेरह व्रत

स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. The Path of Purification (Visuddhimagga) — विसुद्धिमग्ग, अध्याय II, अनु. भिक्खु ञाणमोलि (अंग्रेज़ी) (बाहरी साइट खुलती है)

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